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मुईद सैफी (ब्यूरो चीफ)
टाण्डा। कुरआन-ए-पाक की तालीम हासिल करना और उसके तमाम 30 पारों को सीने में महफूज कर लेना किसी भी मुसलमान के लिए बड़े फ़ख़्र और मसर्रत का मुकाम है। इसी सिलसिले में आरटीआई एक्टिविस्ट इकबाल अहमद के 12 वर्षीय साहबज़ादे अब्दुल्लाह ने हिफ्ज़-ए-कुरआन की तकमील कर अपने खानदान को खुशी का एक यादगार लम्हा दिया है।
हाफिज अब्दुल्लाह ने मदरसा अरबिया तामीर-ए-मिल्लत, अलीगढ़ में रहकर अपनी मेहनत, लगन और दिलचस्पी के साथ कुरआन-ए-पाक के सभी 30 पारों को याद किया। उनकी इस कामयाबी पर मदरसे के असातिज़ा ने उन्हें फूल-मालाएं पहनाकर और प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया। वहीं, रिश्तेदारों और घरवालों ने तोहफ़े पेश कर उनकी हौसला-अफ़ज़ाई की और इस खुशी में अपनी मसर्रत का इजहार किया।
इस पुरमसर्रत मौके पर हाफिज अब्दुल्लाह के वालिद इकबाल अहमद ने कहा कि बेटे का इतनी कम उम्र में कुरआन-ए-पाक हिफ्ज़ कर लेना उनके परिवार के लिए बेहद खुशी और फ़ख़्र की बात है। उन्होंने अल्लाह तआला की बारगाह में दुआ करते हुए कहा कि वह हाफिज अब्दुल्लाह को दीन की सच्ची खिदमत करने वाला बनाए, उनके इल्म में बरकत अता फरमाए और उन्हें नेक रास्ते पर चलने की तौफीक दे।

हिफ्ज़-ए-कुरआन की इस खुशी पर खानदान के लोगों और अहल-ए-इलाका ने हाफिज अब्दुल्लाह को दिली मुबारकबाद पेश करते हुए उनके मुस्तकबिल के लिए नेक ख्वाहिशात का इजहार किया।
